अयोध्या : 25 नवंबर 2025 को अयोध्या राम मंदिर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केसरिया ध्वज फहराया और राम मंदिर के निर्माण कार्य की पूर्णता की आधिकारिक घोषणा की। यह ऐतिहासिक क्षण विवाह पंचमी के पावन अवसर पर मनाया गया।
अयोध्या राम मंदिर पर ध्वजारोहण: एक ऐतिहासिक घटना
अयोध्या की पावन नगरी में 25 नवंबर 2025 को एक ऐतिहासिक पल दर्ज हुआ। इसी दिन श्री राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवा ध्वज फहराया। यह ध्वजारोहण समारोह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि राम मंदिर के निर्माण की पूर्णता का प्रतीक था।
राम मंदिर ध्वजारोहण 2025 का यह आयोजन सदियों के सपने को साकार करता है। अयोध्या के वातावरण में पूरे दिन भक्ति और उत्साह की लहर दौड़ गई। हर कोने में “जय श्रीराम” के जयकारों से परिसर गूंज उठा।
ध्वजारोहण की तारीख और समय: विवाह पंचमी का महत्व
ध्वजारोहण का शुभ मुहूर्त 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक निर्धारित था। यह समय भगवान राम के जन्म नक्षत्र अभिजीत मुहूर्त से मेल खाता है।
25 नवंबर को ध्वजारोहण के लिए चुने जाने के पीछे एक विशेष कारण है। यह दिन विवाह पंचमी का पावन दिन है, जब भगवान राम और माता सीता का विवाह त्रेता युग में हुआ था। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हर साल इस महत्वपूर्ण दिन को मनाया जाता है।
अयोध्या के प्रसिद्ध साधु-संतों के अनुसार, यह तिथि विवाह और शुभ कार्यों के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। इसी कारण प्रशासन ने ध्वजारोहण का आयोजन इसी दिन किया।
ध्वज की विशेषताएं: वैष्णव परंपरा और शास्त्रों का संमिश्रण
राम मंदिर पर फहराए गए ध्वज की विशेषताएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह ध्वज वैष्णव संतों और शास्त्रों के विस्तृत अध्ययन के बाद तैयार किया गया था।
ध्वज की संरचना:
- आकार: समकोण (राइट एंगल) त्रिभुजाकार
- आयाम: 10 फीट ऊंचा और 20 फीट लंबा
- वजन: 2 से 3 किलोग्राम
- डिजाइन: अहमदाबाद के पैराशूट विशेषज्ञ द्वारा डिफेंस मिनिस्ट्री के विनिर्देशन के अनुसार तैयार
ध्वज के प्रतीक:
- केसरिया रंग: बलिदान और त्याग का प्रतीक
- सूर्य चिन्ह: भगवान राम के सूर्यवंशी होने का प्रतीक
- ओम चिन्ह: आध्यात्मिकता का प्रतीक
- कोविदार वृक्ष: शास्त्रीय महत्व
यह ध्वज 161 फीट ऊंचे मंदिर के शिखर और 42 फीट के ध्वज दंड के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया था। 700 टन का यह ध्वज दंड नागर वास्तुकला शैली में निर्मित है।
प्रधानमंत्री का कार्यक्रम: विस्तृत अनुसूची
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को अयोध्या में साढ़े चार घंटे तक रहे। उनके कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी इस प्रकार है:
सुबह की तैयारी:
- पूर्ण निराहार उपवास करते हुए पूजा-अर्चना
- माता अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन
- राम दरबार गर्भगृह में पूजन
मुख्य समारोह:
- 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक ध्वजारोहण
- ध्वज फहराना: रिमोट सिस्टम के माध्यम से (मैनुअल और इलेक्ट्रिक दोनों व्यवस्था)
- राम लला और राम दरबार में आरती
कार्यक्रम का समापन:
- वृंदावन पाठ के माध्यम से मंत्रोच्चार
- संपूर्ण मंदिर परिसर का निरीक्षण
- सात मंदिरों का दौरा
- लोगों को संबोधित करना
- दोपहर 2 बजे तक कार्यक्रम का समापन
ध्वजारोहण की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता
राम मंदिर ध्वजारोहण का अर्थ केवल एक झंडा फहराना नहीं है। यह एक गहरा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश है।
आध्यात्मिक महत्व:
यह ध्वज त्रेता युग के बाद से अयोध्या राजवंश का ध्वज माना जाता है। हजारों सालों के बाद यह ध्वज पुनः श्री राम जन्मभूमि के शिखर पर लहराया जा रहा है।
ऐतिहासिक संदर्भ:
- 9 नवंबर 2019: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण की राह प्रशस्त हुई
- 5 अगस्त 2020: प्रधानमंत्री मोदी ने भूमि पूजन और शिलान्यास किया
- 22 जनवरी 2024: प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन
- 25 नवंबर 2025: ध्वजारोहण के माध्यम से निर्माण कार्य की घोषणा
समारोह की तैयारी: सुरक्षा और व्यवस्था
अयोध्या नगरी 25 नवंबर के लिए पूरी तरह तैयार थी। समारोह की भव्यता और सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्था की गई:
सुरक्षा प्रबंधन:
- सख्त सुरक्षा व्यवस्था मंदिर परिसर में
- केवल आमंत्रित अतिथि को ही प्रवेश (QR कोड के आधार पर)
- आम जनता के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध
- महाराजी वाल्मीकि एयरपोर्ट पर कड़ी सुरक्षा
जनता के लिए दृश्य व्यवस्था:
- 50 से अधिक स्थानों पर LED स्क्रीन लगाई गईं
- LED वैन के माध्यम से सीधा प्रसारण
- शहर भर में जनता को समारोह देखने की सुविधा
सांस्कृतिक कार्यक्रम:
- साकेत से राम मंदिर तक भव्य रोड शो
- सात सांस्कृतिक मंच रास्ते भर में
- राम रामायण पर आधारित नृत्य और संगीत
- पुष्प वर्षा और स्वागत समारोह
ध्वजारोहण में शामिल मुख्य व्यक्तित्व
राम मंदिर ध्वजारोहण 2025 में निम्नलिखित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे:
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (मुख्य आयोजक)
- RSS सरसंघचालक मोहन भागवत
- महंत गोविंद देव गिरी (श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रेजरर)
- उत्तर प्रदेश के राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
- CM योगी आदित्यनाथ
- देश भर से 800+ आमंत्रित अतिथि
- 108 आचार्य (अयोध्या, काशी और दक्षिण भारत से)
विशेष उपस्थिति:
डोम समुदाय के तीन सदस्य भी इस समारोह में आमंत्रित किए गए थे। ये स्वर्गीय डोम राजा जगदीश चौधरी के दूर के रिश्तेदार हैं। यह सामाजिक समावेशन का एक महत्वपूर्ण संदेश है।
वैदिक अनुष्ठान: पांच दिवसीय समारोह
ध्वजारोहण समारोह से पहले 21 से 25 नवंबर तक पांच दिवसीय वैदिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया:
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ
- अथर्वशीर्ष मंत्र का जाप
- यज्ञ कुंड पूजन
- अयोध्या और काशी के प्रमुख संत-महात्मा द्वारा संचालित
राम मंदिर की यात्रा: पूर्ण निर्माण कार्य तक
राम मंदिर की निर्माण यात्रा एक दीर्घ और ऐतिहासिक प्रक्रिया रही है:
मुख्य मील के पत्थर:
- 9 नवंबर 2019: सुप्रीम कोर्ट का फैसला
- 5 अगस्त 2020: भूमि पूजन (COVID-19 महामारी के बीच)
- प्रथम चरण निर्माण: 2020-2023
- 22 जनवरी 2024: प्राण प्रतिष्ठा (राम लला की मूर्ति का अभिषेक)
- द्वितीय चरण कार्य: परकोटा और मंदिर के शिखर का निर्माण
- 25 नवंबर 2025: ध्वजारोहण (निर्माण कार्य की पूर्णता की घोषणा)
समाज पर प्रभाव: सांस्कृतिक पुनरुत्थान
राम मंदिर ध्वजारोहण केवल एक धार्मिक घटना नहीं है। यह भारतीय समाज में एक सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक है।
सामाजिक प्रभाव:
- राष्ट्रीय एकता की भावना का प्रसार
- भारतीय परंपराओं और अध्यात्म का उदयन
- पर्यटन और आर्थिक विकास को गति
- अयोध्या शहर का वैश्विक महत्व
राम मंदिर की भविष्य की योजनाएं
ध्वजारोहण के बाद राम मंदिर परिसर में निम्नलिखित सुविधाओं का विकास किया जाएगा:
- पूर्ण आर्टिफिशियल लाइटिंग सिस्टम
- आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था
- पर्यटकों के लिए सुविधा केंद्र
- परिसर के विभिन्न भागों का विकास
निष्कर्ष: एक ऐतिहासिक पल
अयोध्या राम मंदिर ध्वजारोहण 2025 भारतीय इतिहास का एक अविस्मरणीय पल है। यह समारोह सदियों के सांस्कृतिक सपने का साकार होना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों जब केसरिया ध्वज श्री राम जन्मभूमि के शिखर पर लहराया गया, तो पूरे देश में एक अलौकिक आध्यात्मिक अनुभूति की गूंज सुनाई दी।
राम मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आस्था का केंद्र बन गया है। यह पूरे विश्व को भारतीय मूल्यों और परंपराओं का संदेश देता है।












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