छठ पूजा: सूर्य उपासना की अद्भुत परंपरा जो बिहार-उत्तर प्रदेश से निकलकर दुनिया तक पहुंची

Chhath Puja celebration on river ghat in Bihar and UP | सूर्य उपासना की परंपरा

सूर्य की आराधना से जुड़ी सबसे प्राचीन परंपरा

छठ पूजा भारतीय संस्कृति की उन कुछ परंपराओं में से एक है, जिसका उल्लेख वैदिक काल तक मिलता है। यह पर्व सूर्यदेव और छठी मैया (उषा देवी) की आराधना के रूप में मनाया जाता है।

छठ” शब्द संस्कृत के “षष्ठी” से बना है, जिसका अर्थ है — छठा दिन। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। व्रतधारी इस दिन सूर्यदेव से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और जीवन में प्रकाश की कामना करते हैं।

छठ पूजा की उत्पत्ति: मिथिला और मगध से शुरू हुई आस्था की कहानी

ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टि से छठ पूजा की जड़ें बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश (Purvanchal) क्षेत्र से जुड़ी हैं।

कहा जाता है कि मिथिला में राजा प्रियव्रत की पत्नी मालिनी को पुत्र प्राप्ति नहीं हो रही थी। तब उन्होंने सूर्य की उपासना की और छठी मैया ने उन्हें आशीर्वाद दिया। इसी घटना से छठ पूजा का आरंभ माना जाता है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम और माता सीता ने अयोध्या लौटने के बाद कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्यदेव की पूजा की थी। तभी से यह परंपरा लोक आस्था का पर्व बन गई।

आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य उपासना

छठ पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक और योगिक अभ्यास से भी जुड़ा है। इस व्रत में शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि को विशेष महत्व दिया जाता है।

सूर्यास्त और सूर्योदय के समय जल में खड़े होकर अर्घ्य देने से शरीर को विटामिन D और सौर ऊर्जा प्राप्त होती है। योगशास्त्र के अनुसार, यह प्रक्रिया Solar Plexus Chakra (मणिपुर चक्र) को सक्रिय करती है, जिससे मानसिक संतुलन और ऊर्जा बढ़ती है।

शुद्धता और अनुशासन: छठ की सबसे बड़ी पहचान

छठ पूजा का हर नियम स्वच्छता, संयम और श्रद्धा पर आधारित है। व्रतधारी (अधिकतर महिलाएँ) चार दिन का कठिन निर्जला व्रत रखती हैं, जिसमें वे जल और भोजन से पूर्णतः विरत रहती हैं।
पूजा में प्रयोग होने वाली सामग्री — ठेकुआ, गन्ना, केला, कद्दू-भात, अदरक, और दीपक — सब कुछ प्राकृतिक और बिना प्रसंस्करण (unprocessed) होता है।

“छठ पूजा एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मसंयम और प्रकृति के प्रति समर्पण की साधना है।”

छठ पूजा के चार पवित्र दिन

  1. नहाय-खाय (पहला दिन) – व्रतधारी शुद्ध स्नान कर सादा भोजन “कद्दू-भात” करते हैं।
  2. खरना (दूसरा दिन) – गंगाजल से स्नान कर गुड़-चावल की खीर का प्रसाद बनता है।
  3. संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन) – सूर्यास्त के समय घाटों पर पूजा होती है।
  4. प्रातः अर्घ्य (चौथा दिन) – उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है।

हर दिन का भाव यह है कि मनुष्य सूर्य की ऊर्जा और प्रकृति के तत्वों के साथ एकाकार हो जाए।

घाटों से ग्लोबल मंच तक: छठ पूजा का अंतरराष्ट्रीय प्रसार

एक समय था जब छठ पूजा केवल बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक सीमित थी लेकिन अब यह Global Festival बन चुकी है। आज नेपाल, मॉरीशस, फिजी, ट्रिनिडाड एंड टोबैगो, सूरीनाम, अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में बसे भारतीय प्रवासी बड़े स्तर पर छठ मनाते हैं।

लंदन में थेम्स नदी, न्यू जर्सी में Raritan River, और मॉरीशस के Grand Bassin Lake में इस पवित्र पर्व की झलक अब आम है। विदेशों में बसे भारतीय इस पर्व को अपनी पहचान, संस्कृति और परिवारिक एकता से जोड़ते हैं।

Urban Chhath: बदलती जीवनशैली में नई दिशा

शहरी भारत में छठ पूजा का स्वरूप भी धीरे-धीरे बदल रहा है। अब हाउसिंग सोसाइटियों की छतों (terrace chhath) पर छोटे तालाब बनाए जाते हैं। खासकर कोरोना महामारी के बाद ये प्रचलन ज्यादा बढ़ गया है। नगर निगम और आरडब्ल्यूए (Resident Welfare Associations) द्वारा सामूहिक आयोजन होते हैं। इससे यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि social harmony और community bonding का प्रतीक बन गया है।

Environment-Friendly Festival

छठ पूजा को “India’s most eco-friendly festival” कहा जाता है क्योंकि इसमें

  • कोई loud music नहीं,
  • कोई idol immersion (प्रतिमा विसर्जन) नहीं,
  • और कोई plastic decoration नहीं होती।

पूरे पर्व में केवल मिट्टी, फल, पत्ते और प्राकृतिक सामग्रियाँ प्रयोग की जाती हैं। यह प्रकृति और मानव के co-existence (सह-अस्तित्व) का अनूठा उदाहरण है।

लोकगीत और सांस्कृतिक विरासत

छठ पूजा के लोकगीत इस पर्व की आत्मा हैं।
जैसे —

“केलवा जे फरेला घवद से, ओह पे पात लागल बाना…”
इन गीतों में मातृत्व, त्याग, आस्था और प्रेम की गहराई झलकती है।
आज सोशल मीडिया पर भी #ChhathSongs और #ChhathVrat जैसे ट्रेंड हर साल छाए रहते हैं।

आस्था का बदलता भूगोल

अब छठ केवल गंगा या सरयू किनारे नहीं, बल्कि अरब सागर से अटलांटिक महासागर तक मनाई जाने लगी है। यह भारत की “Soft Power” का प्रतीक है — एक ऐसा पर्व जिसने धर्म, पर्यावरण और विज्ञान — तीनों को एक सूत्र में बाँध दिया है।

जब सूर्य की पहली किरण दुनिया के किसी भी कोने में किसी भक्त के जल में झलकती है,
तो वह बताती है कि भारतीय संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि वैश्विक चेतना है।

निष्कर्ष: छठ पूजा — श्रद्धा से विज्ञान तक की यात्रा

छठ पूजा आज सिर्फ बिहार या उत्तर प्रदेश की नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक पहचान बन चुकी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ तालमेल, परिवार के साथ समर्पण, और सूर्य के साथ एकत्व ही जीवन का सच्चा प्रकाश है। छठ पूजा हर साल हमें यह याद दिलाती है —

“Faith and discipline together create energy — यही है सूर्य उपासना का रहस्य।”

FAQs – छठ पूजा से जुड़े सामान्य प्रश्न

1. छठ पूजा क्या है? (What is Chhath Puja?)

उत्तर: छठ पूजा सूर्यदेव और छठी मैया की उपासना का पवित्र पर्व है। यह चार दिनों तक चलने वाला व्रत होता है जिसमें व्रती शुद्धता, संयम और आत्मनियंत्रण के साथ सूर्य को अर्घ्य देते हैं। यह भारत की सबसे प्राचीन सूर्य उपासना परंपराओं में से एक है।

2. छठ पूजा कब मनाई जाती है? (When is Chhath Puja celebrated?)

उत्तर: छठ पूजा हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। आमतौर पर यह अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ती है, यानी दीपावली के छह दिन बाद।

3. छठ पूजा की शुरुआत कहाँ से हुई? (Where did Chhath Puja originate?)

उत्तर: छठ पूजा की शुरुआत मिथिला और मगध (वर्तमान बिहार) क्षेत्र से हुई मानी जाती है। बाद में यह परंपरा पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, नेपाल और आज दुनिया के कई देशों में फैल गई।

4. छठ पूजा का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है? (What is the religious and scientific significance of Chhath Puja?)

उत्तर: धार्मिक रूप से यह सूर्य और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व है।
वैज्ञानिक दृष्टि से, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय जल में खड़े होकर अर्घ्य देने से शरीर को सौर ऊर्जा, Vitamin D और मानसिक शांति मिलती है। यह पर्व body detoxification और solar energy balance से भी जुड़ा है।

5. छठ पूजा के चार दिन कौन-कौन से होते हैं? (What are the four main days of Chhath Puja?)

उत्तर:
1. नहाय-खाय (Nahay-Khay) – पहला दिन, शुद्धता की शुरुआत
2. खरना (Kharna) – दूसरा दिन, गुड़-चावल की खीर का प्रसाद
3. संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya) – तीसरा दिन, डूबते सूर्य की पूजा
4. प्रातः अर्घ्य (Usha Arghya) – चौथा दिन, उगते सूर्य की पूजा

6. छठ पूजा में कौन-कौन से प्रसाद बनते हैं? (What offerings are made in Chhath Puja?)

उत्तर: छठ पूजा के प्रमुख प्रसाद में ठेकुआ, गुड़ की खीर, केला, नारियल, गन्ना, अदरक, और चावल शामिल होते हैं। सभी प्रसाद बिना नमक और मसाले के बनाए जाते हैं ताकि शुद्धता बनी रहे।

7. विदेशों में छठ पूजा कहाँ-कहाँ मनाई जाती है? (Where is Chhath Puja celebrated outside India?)

उत्तर: आज छठ पूजा मॉरीशस, फिजी, नेपाल, सूरीनाम, ट्रिनिडाड एंड टोबैगो, अमेरिका, कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया और यूएई जैसे देशों में भी बड़े उत्साह से मनाई जाती है। यह प्रवासी भारतीयों के लिए cultural identity और unity का प्रतीक बन चुकी है।

8. छठ पूजा को सबसे पर्यावरण-मित्र त्योहार क्यों कहा जाता है? (Why is Chhath Puja called the most eco-friendly festival?)

उत्तर: क्योंकि इसमें न कोई मूर्ति विसर्जन होता है, न loud music, न chemical colors।
पूजा में प्रयोग होने वाली हर वस्तु — मिट्टी, फल, पत्ते, दीपक — natural और biodegradable होती है।
इसलिए इसे eco-friendly festival of India कहा जाता है।

9. छठ पूजा में कौन लोग व्रत रखते हैं? (Who observes Chhath Puja fast?)

उत्तर: छठ व्रत मुख्य रूप से महिलाएँ रखती हैं, लेकिन पुरुष भी इसे समान श्रद्धा से करते हैं। व्रतधारी को व्रती कहा जाता है, जो पूरे चार दिनों तक पूर्ण संयम और शुद्धता बनाए रखते हैं।

10. छठ पूजा में सूर्यदेव को जल अर्पण क्यों किया जाता है? (Why water offering to the Sun is important in Chhath Puja?)

उत्तर: जल में सूर्य की किरणें परावर्तित होकर शरीर को सौर ऊर्जा और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं।
यह प्रकृति और मानव के बीच ऊर्जा संतुलन (Energy Balance) का प्रतीक है।

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